गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

do sher: लटके रहना सलीब पर तय हैं ज़िन्दगी जब वकील हो जाए

लटके रहना सलीब पर तय हैं
ज़िन्दगी जब वकील हो जाए

राह जब भी तवील हो जाए
इक क़दम एक मील हो जाए

एक मुद्दत से आस हैं आतिश
इश्क़ उसको भी फील हो जाए
आतिश इंदौरी

रविवार, 18 मार्च 2018

Do Sher: मुहब्बत जुर्म हैं साबित हुआ जब से तभी से शह्र में बादल नहीं आए आतिश इंदौरी

मुहब्बत जुर्म हैं साबित हुआ जब से
तभी से शह्र में बादल नहीं आए
आतिश इंदौरी

हुकूमत क्या परिंदों को दे दी ताबिश
मेरी राहों में अब मक़्तल नहीं आए
आतिश इंदौरी
#dedicated to #abbastaabish #taabish

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

Gazal: वो दिखती थी..बड़ी टेड़ी..हो मानो..धूप गर्मी की..

वो दिखती थी..बड़ी टेड़ी..हो मानो..धूप गर्मी की..
मिले जब दिल..तो जाना हैं..वो तो हैं..धूप सर्दी की..

हवा उल्टी चली..जब भी..बनी पतवार..कश्ती की..
हुआ हैं जिस्म..जब ज़ख़्मी..बनी वो..गांठ हल्दी की..

ज़ियादा याद आती हैं..ज़ियादा रंग चढ़ता हैं..
मुहब्बत सूखने पर तो..बनी हैं..गांठ हल्दी की..
आतिश इंदौरी

Sher: मुहब्बत मैं नहीं करता मुनाफ़ा गर नहीं होता ग़मों में ख़ूब-तर कोई इज़ाफ़ा गर नहीं होता आतिश इंदौरी

मुहब्बत मैं नहीं करता मुनाफ़ा गर नहीं होता
ग़मों में ख़ूब-तर कोई इज़ाफ़ा गर नहीं होता
आतिश इंदौरी

बुधवार, 17 जनवरी 2018

Manch


गुथे एसे मुहब्बत में, जुदा होना हैं नामुमकिन
मेरा क्या हैं तेरा क्या हैं, पता होना हैं नामुमकिन

मुहब्बत जुर्म हैं शायद, मुहब्बत पाप हैं शायद
सज़ा एसी मिली हमको, रिहा होना हैं नामुमकिन

मुहब्बत फूल सी लगती, मुहब्बत शूल भी लगती
मुहब्बत में छुपा क्या क्या, पता होना हैं नामुमकिन

समंदर तू हैं क़तरा मैं, मैं तुझमें डूबता हूं अब
तेरा होना रहे शायद, मेरा होना हैं नामुमकिन

मुहब्बत में वहां हूं मैं, जहां कोई नहीं मिलता
सही रस्ते पे हूं क्या मैं, पता होना हैं नामुमकिन
आतिश इंदौरी

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कुछ फ़सादी बने और कुछ से जवानी गुजरी
ढेर किरदार थे सो एक कहानी उतरी

छोटी सी बात पे बच्चों ने कहा मर जाओ
माँ हँसी ख़ूब मगर दिल से सुनामी गुजरी

फ़ैसला इश्क़ का इस तरह सुनाया उसने
बोला की साथ तुम्हारे यूं तो अच्छी गुजरी
आतिश इंदौरी

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वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं
जो सलीक़े से दुआ दे के बिछुड़ जाते हैं

दिल दुआ करता हैं की घर को सलामत रखना
जब भी बेटे बहू के बोल बिगड़ जाते हैं
आतिश इंदौरी

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आदतन मुझको प्यार करना हैं
आदतन उसको वार करना हैं

जीतने वाले शाम को मिलना
हार का जश्न यार करना हैं

या तो वो जीत जाये या फिर में
जो भी हों आरपार करना हैं
आतिश इंदौरी

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मुहब्बत और दारू ऐक सी मानो
सभी पहले पहल इंकार करते हैं
आतिश इंदौरी

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गर वो दरिया नहीं तो तय हैं समंदर होगा
दर्द आँखों में नहीं तो कहीं अंदर होगा

दूसरा ख़ुश हैं तो वो ख़ुश हैं यूँ तबियत होगी
प्यार जो करता हैं वो मस्त कलंदर होगा

रोक लो हाथ पकड़ के उसे जाने मत दो
जीत कर हार रहा हैं तो सिकंदर होगा

बाहरी रूप अलग अस्ल तो अंदर होगा
प्यास बुझती नहीं तो तय हैं समंदर होगा
आतिश इंदौरी


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एक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं
कैसे बच पायेंगें झांसे और भी तो हैं

माँ दवा दारु तेरी कैसे करांऊ
बीबी कहती हैं की बेटे और भी तो हैं
आतिश इंदोरी

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चिट्ठी पे जब तेरा पता लिक्खा
नाम के आगे बेवफ़ा लिक्खा
आतिश इंदोरी
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पेड़ की थोड़ी छाँव ले आना
शहर लौटो तो गाँव ले आना

बात करनी है गर ग़रीबी की
राजा को नंगे पाँव ले आना
आतिश इंदौरी
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पुरखों का हम मकान बेच आये
धरती और आसमान बेच आये

वो उड़ानों की बात करते हैं
जो परिँदे उड़ान बेच आये
आतिश इंदौरी
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जैसा जन्नत में होता हो
दुनिया में भी कुछ वैसा हो

तय एक नदी का आना हो
क़तरा कोई जब प्यासा हो

हिन्दी उर्दू दो बहने हैं
इनका इक घर में रहना हो

मुँह मोड़ा तो आँसू देखे
पीठ नुमायाँ इक चहरा हो

रोए सारा आलम आतिश
भूखा कोई जब सोता हो
आतिश इंदौरी
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कम न हो इश्क़ pyaar सो हालात बदल लेते हैं
क्या बुरा इसमें अगर साथ बदल लेते हैं
आतिश इंदौरी


मंगलवार, 16 जनवरी 2018

Gazal: वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं

वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं
जो सलीक़े से दुआ दे के बिछुड़ जाते हैं
दिल दुआ करता हैं की घर को सलामत रखना
जब भी बेटे बहू के बोल बिगड़ जाते हैं
वक़्त लगता हैं मगर फिर से बहार आयेगी
दौर पतझड़ का हो तो बाग़ उजड़ जाते हैं
लड़कियों का तो जरूरी था भवानी बनना
हर जगह लोंचने को बाज़ नजर आते हैं
जानते थे मेरे बच्चे कि भरोसा तो दो
बूढ़ों का क्या हैं वो बहकावे में आ जाते हैं
सो परिंदों ने भी दूरी बना ली हैं आतिश
तीर लोगों की कमानों पे जो आ आते हैं
आतिश इंदौरी
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वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं
जो सलीक़े से दुआ दे के बिछुड़ जाते हैं

दिल दुआ करता हैं की घर को सलामत रखना
जब भी बेटे बहू के बोल बिगड़ जाते हैं

वक़्त लगता हैं मगर फिर से बहार आयेगी
दौर पतझड़ का हो तो बाग़ उजड़ जाते हैं

सो परिंदों ने भी दूरी बना ली हैं आतिश
तीर लोगों की कमानों पे जो आ आते हैं

लड़कियों का तो जरूरी था भवानी बनना
हर जगह लोंचने को बाज़ नजर आते हैं

जानते थे मेरे बच्चे कि भरोसा तो दो
बूढ़ों का क्या हैं वो बहकावे में आ जाते हैं
आतिश इंदौरी

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Gazal: आम इंसां हूँ एक क़तरा हूँ हर समय हाशिए पे रहता हूँ

आम इंसां हूँ एक क़तरा हूँ
हर समय हाशिए पे रहता हूँ

मेरा व्यापार है दुआओं का
हर किसी को सलाम करता हूँ

बर्फ़ होना हैं मेरी कमज़ोरी
दर्द की आंच से पिघलता हूँ

दिल दिखाता था आइना अक्सर
इसलिए दिल को दूर रखता हूँ

उम्र लम्बी हैं ख़ार की आतिश
फूल हूँ इसलिए बिखरता हूँ
आतिश इंदौरी

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do sher: लटके रहना सलीब पर तय हैं ज़िन्दगी जब वकील हो जाए

लटके रहना सलीब पर तय हैं ज़िन्दगी जब वकील हो जाए राह जब भी तवील हो जाए इक क़दम एक मील हो जाए एक मुद्दत से आस हैं आतिश इश्क़ उसको भी फील ...