बुधवार, 17 जनवरी 2018

Manch



गुथे एसे मुहब्बत में, जुदा होना हैं नामुमकिन
मेरा क्या हैं तेरा क्या हैं, पता होना हैं नामुमकिन
मुहब्बत जुर्म हैं शायद, मुहब्बत पाप हैं शायद
सज़ा एसी मिली हमको, रिहा होना हैं नामुमकिन
मुहब्बत फूल सी लगती, मुहब्बत शूल भी लगती
मुहब्बत में छुपा क्या क्या, पता होना हैं नामुमकिन
समंदर तू हैं क़तरा मैं, मैं तुझमें डूबता हूं अब
तेरा होना रहे शायद, मेरा होना हैं नामुमकिन
मुहब्बत में वहां हूं मैं, जहां कोई नहीं मिलता
सही रस्ते पे हूं क्या मैं, पता होना हैं नामुमकिन
आतिश इंदौरी
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कुछ फ़सादी बने और कुछ से जवानी गुजरी
ढेर किरदार थे सो एक कहानी उतरी

छोटी सी बात पे बच्चों ने कहा मर जाओ
माँ हँसी ख़ूब मगर दिल से सुनामी गुजरी

फ़ैसला इश्क़ का इस तरह सुनाया उसने
बोला की साथ तुम्हारे यूं तो अच्छी गुजरी
आतिश इंदौरी
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वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं
जो सलीक़े से दुआ दे के बिछुड़ जाते हैं

दिल दुआ करता हैं की घर को सलामत रखना
जब भी बेटे बहू के बोल बिगड़ जाते हैं
आतिश इंदौरी
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आदतन मुझको प्यार करता हैं
आदतन उसको वार करना हैं

जीतने वाले शाम को मिलना
हार का जश्न यार करना हैं

या तो वो जीत जाये या फिर में
जो भी हों आरपार करना हैं
आतिश इंदौरी
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मुहब्बत और दारू ऐक सी मानो
सभी पहले पहल इंकार करते हैं
आतिश इंदौरी
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गर वो दरिया नहीं तो तय हैं समंदर होगा
दर्द आँखों में नहीं तो कहीं अंदर होगा

दूसरा ख़ुश हैं तो वो ख़ुश हैं यूँ तबियत होगी
प्यार जो करता हैं वो मस्त कलंदर होगा
आतिश इंदौरी
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एक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं
कैसे बच पायेंगें झांसे और भी तो हैं

माँ दवा दारु तेरी कैसे करांऊ
बीबी कहती हैं की बेटे और भी तो हैं
आतिश इंदोरी
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चिट्ठी पे जब तेरा पता लिक्खा
नाम के आगे बेवफ़ा लिक्खा
आतिश इंदोरी

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

Gazal: वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं

वो कहीं जाते नहीं दिल में जगह पाते हैं
जो सलीक़े से दुआ दे के बिछुड़ जाते हैं

दिल दुआ करता हैं की घर को सलामत रखना
जब भी बेटे बहू के बोल बिगड़ जाते हैं

वक़्त लगता हैं मगर फिर से बहार आयेगी
दौर पतझड़ का हो तो बाग़ उजड़ जाते हैं

सो परिंदों ने भी दूरी बना ली हैं आतिश
तीर लोगों की कमानों पे जो आ आते हैं

लड़कियों का तो जरूरी था भवानी बनना
हर जगह लोंचने को बाज़ नजर आते हैं

जानते थे मेरे बच्चे कि भरोसा तो दो
बूढ़ों का क्या हैं वो बहकावे में आ जाते हैं
आतिश इंदौरी

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Gazal: आम इंसां हूँ एक क़तरा हूँ हर समय हाशिए पे रहता हूँ

आम इंसां हूँ एक क़तरा हूँ
हर समय हाशिए पे रहता हूँ

मेरा व्यापार है दुआओं का
हर किसी को सलाम करता हूँ

बर्फ़ होना हैं मेरी कमज़ोरी
दर्द की आंच से पिघलता हूँ

दिल दिखाता था आइना अक्सर
इसलिए दिल को दूर रखता हूँ

उम्र लम्बी हैं ख़ार की आतिश
फूल हूँ इसलिए बिखरता हूँ
आतिश इंदौरी

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सोमवार, 1 जनवरी 2018

Gazal: गुथे एसे मुहब्बत में, जुदा होना हैं नामुमकिन मेरा क्या हैं तेरा क्या हैं, पता होना हैं नामुमकिन

गुथे एसे मुहब्बत में, जुदा होना हैं नामुमकिन
मेरा क्या हैं तेरा क्या हैं, पता होना हैं नामुमकिन

मुहब्बत जुर्म हैं शायद, मुहब्बत पाप हैं शायद
सज़ा एसी मिली हमको, रिहा होना हैं नामुमकिन

मुहब्बत फूल सी लगती, मुहब्बत शूल भी लगती
मुहब्बत में छुपा क्या क्या, पता होना हैं नामुमकिन

समंदर तू हैं क़तरा मैं, मैं तुझमें डूबता हूं अब
तेरा होना रहे शायद, मेरा होना हैं नामुमकिन

मुहब्बत में वहां हूं मैं, जहां कोई नहीं मिलता
सही रस्ते पे हूं क्या मैं, पता होना हैं नामुमकिन
आतिश इंदौरी
 https://www.youtube.com/watch?v=UaTZ9mdW1Ac

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

Nazm: शिकारी फिर से मचान पर बैठें हैं

शिकारी फिर से मचान पर बैठें हैं
बिछा दिए हैं फिर सबने जाल
उठा दिए गए हैं फिर मुद्दे
पोलेराईज़ किए जा रहे हैं पंक्षी
लाल हरे भगवा आदि जालों में स्वतः फंसने को
आतिश इंदौरी

Gazal: मैं सब में अपना हिस्सा छोड़ जाता हूँ न गुजरे एसा क़िस्सा छोड़ जाता हूँ

मैं सब में अपना हिस्सा छोड़ जाता हूँ
न गुजरे एसा क़िस्सा छोड़ जाता हूँ
पुराना टूटा फूटा हूँ दिया माना
दिलों में पर उजाला छोड़ जाता हूँ
मरूँगा कैसे जब हर एक के अंदर
बदन का थोड़ा हिस्सा छोड़ जाता हूँ
कमाऊँगा मैं पहले साख बनने दो
इसी कारण मुनाफ़ा छोड़ जाता हूँ
आतिश इंदौरी

Gazal: किया भाईयों ने दीवार उठाना तय हुआ घर के शजर का काटा जाना तय

किया भाईयों ने दीवार उठाना तय
हुआ घर के शजर का काटा जाना तय
किया इतना नज़र बस फेर ली उसने
समंदर का हुआ आँखों में आना तय
मुझे दिखने लगे फिर चाँद में मामा
बहुत ख़ुश हूँ कि बचपन फिर से पाना तय
रिहा पिंजरे से करने की हैं जल्दी क्या
हुआ क्या दूसरे पंक्षी का आना तय
सभी बेटों की शादी क्या हुई आतिश
हुआ माँ बाप का फिर बाँटा जाना तय
आतिश इंदौरी

Manch

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